(" बैठकी - दस " के बारे में एक स्पष्टीकरण और साथ में क्षमा-याचना भी) :यह कि इस नाचीज़ ने बैठकी - दस के अन्तर्गत
शहीद निर्मल महतो महामानव सेवा संस्था का उल्लेख करते हुए यह घोषणा की थी कि फिलहाल इस संस्था से सम्बद्ध कुछ तस्वीरें प्रस्तुत कर रहा हूँ और विशेष सामग्री बाद में यानी फुर्सत से दूँगा । पर हुआ यह कि एक तरफ तो वो तस्वीरें कहीं अपलोड करते समय ही गायब हो गईं (जिसका नोटिस मैंनें काफी विलम्ब से लिया) , और दूसरी तरफ आलस-आलस में यह विशेष सामग्री का मामला भी लम्बा खिंच गया ।
पर इस सबसे भी खराब बात यह हुई कि आज जब मैं इस विलम्बित अध्याय को पूरा करने बैठा तो देख क्या रहा हूँ कि
" बैठकी - दस " अपने जड़ - समेत कहीं गायब हो गयी है । और यही कारण है कि मैंने आज की इस बैठकी की संख्या
ग्यारह ही लिखी है चूंकि मुझे उस
बैठकी (दस) के निमित्त सामग्री को आज पोस्ट करना है और कायदे से इस बैठकी की सही संख्या ग्यारह ही ठहरती है। विद्द्वज्जनों से आग्रह है कि कृपया पिछली बैठकी की सही संख्या
" दस " मानें ।
झारखण्ड राज्य के सरायकेला-खरसावाँ जिले में एक छोटी तहसील है चान्डिल । यह आदिवासी-बहुल इलाका है और यहाँ के ज्यादातर लोग सीधे-सादे, अशिक्षित और गरीब हैं। इनके स्वास्थ्य का स्तर वैसा ही है जैसी कि इस माहौल में रहने वाले लोगों की हो सकती है । चिकित्सा-सुविधाएँ न के बराबर ही कहिये ।
ऐसे में एक जन हैं श्री भरत सिंह घटवार । कभी शौकिया तौर पर एक्यूप्रेसर चिकित्सा सीखी थी , आज वही इनकी समाज-सेवा का जुनून बन गया है । जब समाज-सेवा करने की इच्छा जगी तो साथ-साथ योग भी सीखा और उसमें भी दक्षता प्राप्त कर ली । अब हाल यह है कि इस तहसील में ही नहीं अगल-बगल के क्षेत्रों समेत दूर-दराज के इलाकों से भी लोग-बाग़ यहाँ उनसे निःशुल्क चिकित्सा और बाकायदा इन सुविधाओं का प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए आते हैं ।
इनकी ख्याति निवर्तमान राज्यपाल डा० सिब्ते रज़ी तक भी पहुँची और उन्होंने इनकी सेवाओं से तथा समाज-सेवा की भावना से प्रभावित होकर इन्हें सम्मानित भी किया ।
ये एक एन० जी० ओ० भी चलाते हैं जिसके अन्तर्गत कई किस्म की सेवाएँ जरूरतमन्दों को दी जाती हैं । इस संस्था का नाम
"शहीद निर्मल महतो महामानव सेवा संस्था " है जिसकी कार्यकारिणी समिति अपने अध्यक्ष श्री घटवार और सचिव श्री सुधीर घोराई के मार्ग निर्देशन में निःस्वार्थ भाव से प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ रही है । ताजा मिली सूचना के आलोक में बताते चलें कि आगामी 13 जून से समाज के सभी
वर्गों और सभी
वय-समूह के लोगों के लिए बिलकुल निःशुल्क अंग्रेजी की शिक्षा दी जायेगी और वह भी शुरुआती स्तर से । श्री घोराई ने बताया कि प्रख्यात शिक्षक श्री विजय आनन्द ने, जो खुद को एक अच्छे शिक्षक से कहीं ज्यादा एक अच्छा मनोवैज्ञानिक मानते हैं (और जिसकी जरूरत वह जड़गत रूप से महसूस करते हैं), इस हेतु अपनी सेवाएँ देने के लिए सहर्ष अपनी स्वीकृति प्रदान की है।
इस संस्था के तत्त्वावधान में आयोजित दस दिवसीय योग प्रशिक्षण शिविर का समापन समारोह गत 24 मई को स्थानीय चांडिल डैम स्थित शीश महल के परिसर में , इस संस्था के कार्यालय-भवन में संपन्न हुआ । करीब एक सौ से ज्यादा प्रशिक्षुओं ने इसमें हिस्सा लिया और लाभान्वित हुए । झारखण्ड के पूर्व- उपमुख्यमंत्री
श्री सुधीर महतो ने इस अवसर पर अपनी शुभेच्छाएँ प्रकट कीं और तमाम पारम्परिक चिकित्सा-प्रणालियों की विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला । साथ ही सभी प्रशिक्षणार्थियों को उन्होंने इससे सम्बद्ध प्रमाण-पत्र भी प्रदान किये।
हर वर्ष आयोजित होने वाले इस शिविर में कलकत्ते से योग के प्रसिद्ध चिकित्सक डा० अरुण कुमार उपाध्याय और श्री प्रदीप कुमार जायसवाल ने भी अपनी सेवाएँ दीं और पुन्य-लाभ किया।
( शिविर से सम्बन्धित तस्वीरें और चल-चित्र किसी अगली बैठकी में )