रविवार, 14 मार्च 2010

(बैठकी - सात)

इब्तिदा-इ-इश्क में हम .....

बेड़ा गर्क !! साल की शुरुआत में ही गलती हो गयी । मामूली-ही सही, मगर गलती तो गलती है । हुजूर माई-बाप, आपने भी तो नहीं बताया ? .... खैर !
पिछली बैठकी पांचवी नहीं, छठी थी । उस हिसाब से आज की बैठकी सातवीं हुई । आज से सुधरी हुई अवस्था में बैठकी की संख्यायों को लिखने का संकल्प लेता हूँ । .... तीसरी नहीं , दूसरी भी नहीं -- सिर्फ पहली कसम खाता हूँ , बाकी कसमों को खाने का भी संकल्प लेता हूँ, मगर फिर कभी, दूसरे मौकों पर ।

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