शुक्रवार, 11 जून 2010

(बैठकी - बारह)

फिर से कुछ चुनिन्दा गाने :

मन आज थोडा -सा रूमानी हो चला है। आइये , चलें थोडा रूमानी हो लें। जरूर लिखें मेरे पसंदीदा गाने आपको भी पसन्द आये या नहीं ।

(गाना - एक)






(गाना - दो )





(गाना - तीन)





पिछली बार संगीता जी ( संगीता पुरी ) ने गानों पर दो शब्दों की एक टिप्पणी भेजी थी मन बहुत खुश हुआ , दो शब्दों में ही उन्होंने जता दिया कि वे एक sincere श्रोता (और ब्लॉगर ) हैं कोटिशः धन्यवाद और दोस्तों से भी मेरी विनती है कि अच्छी या बुरी जैसी भी हो अपनी प्रतिक्रिया मुझे अवश्य लिखें हौसला बढ़ता है See you !

5 टिप्‍पणियां:

आचार्य उदय ने कहा…

आईये पढें ... अमृत वाणी।

Jandunia ने कहा…

सुंदर पोस्ट

माधव( Madhav) ने कहा…

nice

संगीता पुरी ने कहा…

आज भी सुन रही हूं !!

mobile phones ने कहा…

प्रथम गाने के सन्दर्भ में कहना चाहूँगा कि यदि सीखने के ललक हो तो हर बात से कुछ न कुछ सीखा जा सकता है। इसके बाद मै आपके प्रेम की भावना के पराकास्ठा को प्रणाम करता हूँ परमात्मा से प्रार्थना करता हूँ कि आपकी इस भावना को समझने वाला कम से कम कोई एक हमेशा जिन्दगी के हर कदम पर आपके साथ रहे। आपका अंदाजे बाया काफी पसंद आया
आमीन